My Contrac Wife
"MY CONTRACT WIFE" EP - 1
Episode Title - शादी या सौदा
" आज इतने दिन बाद मेरी याद कैसे आयी तुम्हे..?"- गाढ़े लाल रंग का
टाइट टॉप पहने हुए एक लड़की ने अपने गले से चिपके हुए शख्स के
कानों में बुदबुदाते हुए कहा। रूम की डिम लाइट के बावजूद उस शख्स का गठीला और गोरा बदन चमक रहा था।
वो शख्स उस लड़की की बातों को कुछ यूँ इग्नोर कर रहा था, जैसे मानो
उसे कुछ सुनाई ही नहीं दे रहा हो। वो लगातार उस लड़की के गले और
होठों को अपनी आँख बन्द किए हुए चूमे जा रहा था।
“उम्मम....! आराम से....! मैं यहीं हूँ...! अभी तो पूरी रात पड़ी है...!"-
लड़की ने उस शख्स की ओर देखकर मुस्कुराते हुए कहा।
लड़की के इतना कहने के बावजूद वो शख्स इस कदर जल्दी में था मानो आज ये उसकी जिन्दगी की आखिरी रात हो...!
उस शख्स ने अपने फोन की तरफ एक नजर डाली और फिर से अपने
काम मे लग गया। लेकिन कुछ ही पल में वो उठ खड़ा हुआ और फिर
फोन अपने हाथ मे लेकर कमरे से बाहर जाने लगा।
"आरव.....! क्या हुआ...? कहाँ जा रहे हो...?" उस लड़की ने खुद को
सफेद चादर के बीच समेटते हुए कहा।
"कहीं नहीं...! आज की मीटिंग डन..! गुड नाईट....! फिर मिलेंगे...!"-
आरव ने उस लड़की की तरफ देखते हुए कहा और फिर एक सेकण्ड में कमरे से बाहर निकल गया।
“हाँ...! अंकल...? बोलिये क्या हुआ...? लड़की का कुछ इंतजाम
हुआ...?". आरव ने गाड़ी स्टार्ट करते हुए कहा और होटल से अपनी
हवेली के लिए निकल पड़ा।
"आ...! अभी तो नहीं....! लेकिन मैं... मैं कोशिश कर रहा हूँ...!"- फोन के दूसरी तरफ से अधेड़ उम्र के भरत अंकल की आवाज सुनाई पड़ी।
"कोशिश नहीं अंकल...! रिजल्ट दीजिए...! रिजल्ट..! अब मेरे पास
कोई और रास्ता नहीं है...! सिर्फ यही एक तरीका बचा है... सब कुछ
बचाने का....!". आरव ने थोड़ा पैनिक होते हुए कहा।
आरव को यूँ परेशान देख कर भारत अंकल को आरव का वो मासूम
चेहरा याद आ गया जो उन्होंने आज से तकरीबन 22 साल पहले उसकी मां की मौत पर देखा था। भरत अंकल की आँखों के सामने से वो दृश्य आज भी नहीं हटता है जब 8 साल का आरव अपनी माँ की लाश के सामने अपनी छोटी बहन अनन्या को गोद में लेकर खड़ा था। माँ की मौत ने आरव की जिंदगी बदल कर रख दी थी। हँसता खेलता आरव उस घटना के बाद पूरी तरह से बदल गया। माँ के जाने के बाद उसके पिता अजय सिंह मेवाड़ को इतना गहरा सदमा लगा की वो आज तक उस सदमे से उबर नहीं पाए।
"अंकल.....!! आप सुन रहे हैं ना..? मैं क्या कह रहा हूँ...?" - आरव ने
फोन पर लगभग चिल्लाते हुए कहा।
"हाँ....!! हाँ...! सुन रहा हूँ...!". आरव की आवाज ने भरत अंकल को
ख्यालों की दुनिया से बाहर निकालकर पटक दिया।
"दादाजी कैसे हैं...? वो ठीक तो हैं...?? उन्होंने तुम्हें अचानक जयपुर
क्यों बुलाया था ?"- भरत अंकल ने तुरंत ही आरव से सवाल किया।
"दादाजी ने ये बताने के लिए बुलाया था कि अगर एक हफ्ते के भीतर
मैंने शादी नहीं कि तो फिर वो अपनी पूरी प्रॉपर्टी विक्की के नाम कर
देंगे...!"
"क्या..??"- भरत अंकल ने चौकते हुए कहा।
"हाँ...! तो फाइनली अगर अपनी कम्पनी और घर बचाना है तो 1 हफ्ते
के भीतर मुझे शादी करनी होगी...!"- आरव ने थोड़े व्यंगात्मक लहजे में
कहा।
"तुम....अगर किसी एक लड़की के साथ सीरियस होते तो आज ये सब
प्रॉब्लम ही ना होती...!"- भरत अंकल ने थोड़े व्यंग्यात्मक लहजे में
कहा।
"
'अंकल मैं ऐसे किसी भी लड़की से शादी नहीं कर सकता...! मुझे शादी
कर के अपनी प्रॉब्लम सॉल्व करनी है... प्रॉब्लम बढ़ानी नही है..!"
" हम्मम...!"- भरत अंकल ने अपना सिर हिलाते हुए कहा। वो आरव की
बात अच्छे से समझ गए थे।
30 साल का आरव के भीतर हर वो क्वालिटी थी जो कोई भी लड़की
अपने होने वाले जीवनसाथी में देखना चाहती है। 5 फुट 11 इंच की
लम्बाई... बड़ी-बड़ी और हल्की भूरी आँखें और उन आँखों पर हल्के लेंस
वाला चश्मा...! जो कि उसकी गम्भीरता और समझदारी को बखूबी
बयान करता था। महज 30 साल की उम्र में ही आरव ने वो सब कुछ
हासिल कर लिया था जो बाकी लोग शायद ताउम्र भी हासिल नहीं कर
पाते। वो किसी भी हालात में अपने पापा की बनाई हुई इस कम्पनी को
डूबने नहीं देना चाहता था। क्योंकि ये ना सिर्फ उसके पापा का बल्कि
उसका भी गुरूर था।
लेकिन, लड़कियों के मामले में आरव की किस्मत थोड़ी खराब रही है।
आज तक उसे सिर्फ उसके पैसे से प्यार करने वाली लड़कियां ही मिली
हैं। और इसलिए आरव अब लड़कियों को सिर्फ पैसे से नाचने वाली
कठपुतली समझता है। ये बात भरत अंकल भी अच्छे से जानते थे।
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-11-
अगले दिन सुबह उठते ही वो यहाँ से मुम्बई के लिए निकल गया। हवेली
से जयपुर एयरपोर्ट के रास्ते के बीच अचानक से उसका फोन बज उठा।
"हैलो...! अंकल...! क्या हुआ..?"
"आरव...! वो...! वो बैंक की टीम ऑफिस में आयी हुई है...! वो लास्ट
वार्निंग पेपर लेकर आये हैं..!"- भरत अंकल ने घबराते हुए कहा । "ये
लोग बोल रहे हैं कि अगर एक हफ्ते के अन्दर 1000 करोड़ नही रिटर्न
किये तो....तो...!"
"हहहह.....! उनको किसी तरह से समझाइये की मैं एक हफ्ते में सारे
पैसे चुका दूँगा..!"- आरव ने लम्बी साँस छोड़ते हुए जवाब दिया और
फिर कॉल कट कर दिया।
" अरे... अरे...! अंधी है क्या...??"- आरव ने अचानक से गाड़ी का
इमरजेंसी ब्रेक लगाते हुए कहा। मुम्बई एयरपोर्ट से निकलकर वो होटल
रोज एंड क्राउन की तरफ जा रहा था, जहाँ पर उसकी इन्वेस्टर्स के साथ
मीटिंग थी।
वो तुरन्त गाड़ी का विंडो नीचें कर के बाहर रोड की तरफ़ उत्तेजित होकर
देखने लगा। सामने एक लड़की एक बूढ़ी दादी का हाथ पकड़कर उन्हें
रोड क्रॉस करवा रही थी।
" अरे...! पागल हो क्या...? दिखाई नहीं पड़ता... ??" - आरव ने उस
लड़की की तरफ़ देखकर चिल्लाते हुए कहा।
तब जाकर उस लड़की ने पलटकर आरव की तरफ देखते हुए ट्रैफिक
लाइट की तरफ़ इशारा किया। आरव ने ऊपर देखा तो लाइट रेड थी
और उसके अगल- बगल भी गाड़ियों की कतार लगी हुई थी। आरव
चुपचाप सीट पर वापस बैठ गया और उस लड़की की तरफ़ ध्यान से
देखने लगा।
उस लड़की ने गाढ़े गुलाबी रंग के सूट के साथ सफेद रंग का दुपट्टा अपने
कंधों पर रखा हुआ था। कानो में बड़े- बड़े झुमके और माथे पर लाल रंग
की गोल बिन्दी और आँखों मे हल्का काजल...!
चेहरे पर बेहद खूबसूरत सी मुस्कान और ऐसी संतुष्टि झलक रही थी कि
जैसे किसी छोटे बच्चे को उसका मनपसंद खिलौना मिल गया हो...!
आरव एक टक उस लड़की की ओर देखने लगा, उसके चेहरे से परेशानी
की लकीरें गायब हो चुकी थी। उसकी जगह पर अब एक सन्तुष्टि वाली
मुस्कान दिखाई पड़ रही थी। वो तब तक उस लड़की को देखता रहा जब
तक कि वो उसकी आँखों से ओझल नहीं हो गयी।
"ओए...! आगे चल ना....! इधर जाम लगाएगा क्या...?". अचानक से
किसी आदमी ने गाड़ी के विंडो पर नॉक करते हुए कहा।
अब जाकर आरव वास्तविक दुनिया मे वापस आया और उसने
एक्सिलरेटर पर जोर देते हुए गाड़ी आगे बढ़ा दिया।
उस लड़की के बारे में सोचते-सोचते आरव ... होटल रोज एंड क्राउन
पहुँच गया। आरव कार पार्क कर ही रहा था की तभी उसके फ़ोन पर
एक बीप की आवाज हुई। आरव ने फोन चेक किया तो मैसेज देखते ही
उसके चेहरे का रंग उतर गया। ये मैसेज तनेजा की तरफ से था, उसने
मीटिंग कैंसिल कर दी थी। आरव ने तुरन्त उसको कॉल किया लेकिन
उसने आरव का फोन नहीं उठाया।
"आआहह....! हहहह..!"- आरव ने गुस्से से चीखते हुए अपना हाथ
गाड़ी की स्टेयरिंग पर दे मारा। अब उसकी आखिरी उम्मीद भी दम तोड़
चुकी थी!
"हहहह....!"- आरव ने निराश होकर वापस लौटने के लिए गाड़ी घुमाई
ही थी कि अचानक से उसकी नजर एक छोटे से बार पर पड़ी और उसने
बिना कुछ सोचे समझे गाड़ी बार के सामने लगा दिया। उसने अपने सिर
पर कैप लगा लिया ताकि वहाँ कोई उसे पहचान ना सके।
आरव इस तरह के बार में पहली बार आया था। वो चुपचाप एक खाली
टेबल पर बैठ गया और टेंशन में उसने वेटर को ड्रिंक लाने का इशारा
कर दिया। अभी उसने ड्रिंक का एक सिप लिया ही था की तभी उसकी
कुर्सी से ठोकर खा कर एक लड़की ज़मीन पर गिरने लगी। आरव ने झट
से अपना दूसरा हाँथ आगे बढ़ा कर उसे गिरने से बचा लिया।
" ओहहह...! लगी तो नहीं...??" - आरव ने उसे सँभालते हुए सवाल
किया।
"नहीं...!"- उस लड़की ने आरव की ओर देखते हुए जवाब दिया और
फिर वो अपने पैर से बाहर निकली हील वाली सैंडल को फिर से पहनने
की कोशिश में लग गयी।
आरव दंग होकर उस लड़की की ओर देखने लगा। ये तो वही ट्रैफिक
लाइट वाली लड़की थी। लेकिन अब उसकी आँखों का हल्का काजल,
चटक रंग में तब्दील हो चुका था। गुलाबी रंग के सूट की जगह अब उसने नीले रंग की शॉर्ट ड्रेस पहनी थी और उसकी पलकें भी नीले रंग में
रंगी हुई थी। एक बार के लिये तो आरव को अपनी आंखों पर यकीन ही
नही हुआ।
कहानी जारी रहेगी, आप जुड़े रहे "MY CONTRACT WIFE” के
साथ !
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